Monday, February 18, 2013

माँ

जब मेरी माँ मेरे पास है,
कदमों में मेरे आकाश है।
माँ है मुकम्मल दुनिया मेरी,
इसका मुझे अहसास है।

Saturday, December 8, 2012

लघुकथा-"स्याणो"

"सुणो हो के स्याणो ?"
"के केवै बावळी !"
.........बा रोटी सेकण लागगी।
-हरीश हैरी

Saturday, November 24, 2012

लघुकथा-"शमां और परवाना"

लोग कहते हैं कि शमां जलती है तो परवाने प्यार जताने चले आते हैं मगर सच कुछ और था..........परवाने को ये उजाला फूटी आँख नहीं सुहाता था। दिन के उजाले में परवाने कुछ नहीं कर पाए,मजबूरन उन्हें छिपना पङा।शाम हुई,शमां जली।घात लगाकर बैठे परवानों ने एक साथ धावा बोल दिया। परवाने एक-एक कर शहीद होते जा रहे थे पर शमां की सेहत पर कोई असर नहीं पङा।तभी एक परवाने ने वो कारनामा कर दिखाया जो अब तक कोई नहीं कर सका।उसने अपने पंख को जलती शमां पर इस अंदाज से मारा कि शमां पलक झपकते ही बुझ गई।परवाने झूम रहे थे उनकी कट्टर दुश्मन शमां खत्म हो चुकी थी और अब कमान उनके साथी अंधेरे के हाथ में थी।
 -हरीश हैरी

Monday, November 19, 2012

18 S.P.D.में हास्य कवि सम्मेलन के दौरान प्रस्तुति देते हुए हरीश हैरी मार्च 2012

18 S.P.D.में हास्य कवि सम्मेलन के दौरान प्रस्तुति देते हुए हरीश हैरी मार्च 2012

Sunday, November 18, 2012

लघुकथा-"मंगळवार"

"बाई कई दिनां स्यूं किं कोनी खायो...रोटी..."
-बाबा आज म्हारै तो मंगळवार है।
उगते बुधवार नै गाँव रे बारै भीखमंगे री
लास पर कागला बैठ्या हा।
-हरीश हैरी 

लघुकथा-"बदळाव"

"और भिया किंया है?"रामलाल गळी बगते नै बुझ्यो
 -"ठीक है बाई!"उणनै पड़ुत्तर मिल्यो
बीं दिन पछै रामलाल मीठो बोलणो छोड दियो।
-हरी
श हैरी    

Saturday, November 17, 2012

लघुकथा-"टैम"

"भाई जी के काम पुळा राख्यो है?"
"किं कोनी,बैहलो ही हूँ।"
"तो कदैई घरै पधारो,बात-बतळ करां।"
"अब थानै के बतावां...टैम ई कोनी!"
-हरीश हैरी

Sunday, February 12, 2012

लघुकथा-"यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते"

आज फिर इंद्र का सिंहासन डोलने लगा।उर्वशी को याद किया गया।उर्वशी ठहरी गुलाम!पति और बच्चों को छोड़कर ऋषि............तपस्या भंग!श्राप मिला,पत्थर हो गई।
       अप्सराएं महीन कपड़ों में सज-धज कर झुक-झुक कर देवताओं को अपने हाथों से शराब पिला रहीं थी।अंगूर और नमकीन परोसे जा रहे थे।शराब और शबाब.......सब मस्त!इंद्र की यह अविस्मरणीय विजय थी !
      ........और धरती पर ऋषि बड़े गर्व से बालकों को पढ़ा रहे थे-"यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:!"

-हरीश हैरी 

Friday, December 9, 2011

rafi ka gaya english song ka lyric.

I love her, love her, love her, love her, so will you,
The she I love is a beautiful, beautiful dream comes through.
Because she thinks it pleases me,
Like a cat, rat she seizes me,
She tickles me, she teases me,
She warms me up, she freezes me
I love her, love her, love her, love her, what shall I do,
The she I love is a beautiful, beautiful dream comes through.
O she is a flower lovely and rare,
Her beautiful body seems to bear,
The magical mood of morning air,
And black as night is her raven hair,
I love her, love her, love her, love, my love is true
The she I love is a beautiful, beautiful dream comes through.

लघुकथा-"दळदळ"

"कुण सै दळ मांय है रे तू ?"
"साब!गरीब हूँ,अबार तो दळदळ मांय हूँ!"
 -हरीश हैरी